मैथन डैम में आधुनिक बोटिंग सेंटर निर्माण पर आदिवासी समुदाय में उबाल, “हमारे जल, जंगल और ज़मीन पर कब्ज़ा नहीं सहेंगे”
Report By Amit Singh
गोगना/मैथन (धनबाद) :
मैथन के गोगना क्षेत्र में उड़ीसा के कुछ व्यापारियों द्वारा आधुनिक बोटिंग सेंटर स्थापित करने की योजना ने स्थानीय आदिवासी समुदाय में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। आदिवासियों का कहना है कि यह परियोजना उनके पारंपरिक जीवन, आजीविका और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनकर आई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस परियोजना की शुरुआत बिना किसी जनसुनवाई या ग्रामसभा की सहमति के की जा रही है। दशकों से गोगना के आदिवासी समुदाय मछली पकड़ने, नाव चलाने और पारंपरिक कार्यों पर निर्भर हैं। उनका कहना है कि “बोटिंग सेंटर” बनने से उनका रोजगार पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
गोगना निवासी कृष्णा मरांडी ने कहा, “हमारे बच्चों के पास न सही स्कूल है, न स्वास्थ्य सुविधा, और न ही रोजगार का कोई विकल्प। डी वी सी ने हमारी बुनियादी ज़रूरतों पर कभी ध्यान नहीं दिया, लेकिन अब बाहरी व्यापारियों को हमारे जल और ज़मीन का मालिक बना रही है। यह हमारा शोषण है, विकास नहीं।”
आदिवासी महिलाएं भी इस विरोध में खुलकर सामने आई हैं। उनका कहना है कि इस परियोजना से जल प्रदूषण बढ़ेगा, मछलियों की संख्या घटेगी और उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा। “हमारे झील और मछलियां हमारी ज़िंदगी हैं, इन्हीं से हमारा घर चलता है। बोटिंग सेंटर से सब कुछ खत्म हो जाएगा,” एक महिला ने आंसुओं भरी आंखों से कहा।
आदिवासी समुदाय की प्रमुख मांगें:
मैथन गोगना क्षेत्र में बोटिंग सेंटर परियोजना को तत्काल रोका जाए।
किसी भी विकास कार्य से पहले ग्रामसभा की सहमति ली जाए।
स्थानीय युवाओं के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की ठोस व्यवस्था की जाए।




